यूपी में आरक्षण की मांग कर रही भीड़ ने पुलिसकर्मियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा और एक को मार डाला, पीएम मोदी की रैली से लौट रहे थे

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उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में पीएम मोदी की रैली से लौट रहे लोगों पर हुई पत्थरबाजी में मारे गए पुलिसकर्मी के परिवार के लिए सीएम योगी ने 50 लाख के मुआवजे का ऐलान किया है

गाजीपुर: उत्तरप्रदेश के गाजीपुर में आरक्षण की मांग कर रही भीड़ ने शनिवार शाम एक पुलिस जवान को पीट-पीट कर मार डाला। यह हादसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के कुछ घंटों बाद हुआ। इस महीने राज्य में यह दूसरा मामला है, जब भीड़ ने पुलिसकर्मी की हत्या की है। इससे पहले 3 दिसंबर को बुलंदशहर में गोहत्या के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

निषाद पार्टी के कार्यकर्ता हाईवे जाम कर आरक्षण की मांग कर रहे थे, उन्हें हटाने पहुंची पुलिस टीम पर हमला हुआ.

भीड़ द्वारा पुलिसकर्मी की हत्या करने का उत्तर प्रदेश में यह एक महीने में दूसरा मामला.

3 दिसंबर को बुलंदशहर में इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की गोली मारकर हत्या हुई थी.

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में भारतीय जनता पार्टी की रैली से लौट रहे पुलिस कर्मियों पर जबरदस्त पथराव हुआ है। इस पथराव में एक पुलिस जवान को अपनी जान गंवानी पड़ी जबकि दो लोग घायल बताए जा रहे हैं। यह हमला उस समय हुआ जब पुलिसकर्मी प्रधानमंत्री की रैली से लौट रहे थे। थाना अटवा मोड के नुनहुरा इलाके में कुछ निषाद पार्टी के लोग प्रर्दशन कर रहे थे जब उन्होंने भीड़ को समझाने की कोशिश की तो वो उग्र हो गई।

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इस दौरान पुलिस पर पथराव कर दिया और पथराव इतना भीषण था कि पुलिस कांन्सेटबल सुरेश वत्स की मौत हो गई। पत्थरबाजी में मारे गए पुलिसकर्मी के परिवार के लिए यूपी सरकार ने 50 लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान किया है। मुकेश वत्स की पत्नी को 40 लाख रुपये और उनके माता-पिता को 10 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। यहीं नहीं मुकेश की पत्नी को असाधारण पेंशन और परिवार के एक सदस्य को मृतक आश्रित के तौर पर सरकारी नौकरी देने का भी ऐलान किया गया है। परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जाएगी।

आपको बता दें कि निषाद समाज के लोग आरक्षण की मांग को लेकर जिले में कई जगहों पर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। निषाद पार्टी के छत्रपति निषाद ने कहा, ‘हम निषादों के लिए आरक्षण की मांग कर रहे हैं और अपने लोगों के बीच आरक्षण का संदेश फैला रहे हैं। इलाहाबाद से शुरू होकर, हम पूरे राज्य में प्रदर्शन करेंगे। 4 साल हो गए, लेकिन न तो पीएम और न ही सीएम ने निषादों की मांग पूरी की।’

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डीएम और एसएसपी को आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आदेश देते हुए कहा है कि उनकी तुरंत गिरफ्तारी होनी चाहिए। बता दें कि इससे पहले बुलंदशहर में भीड़ ने पुलिस पर हमला किया था जिसमें एक पुलिस इंसपेक्टर की मौत हो गई थी। 3 दिसंबर को गौवंश के अवशेष मिलने के बाद बुलंदशहर के स्याना इलाका हिंसा की चपेट में आ गया था। इसके बाद इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

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पुलिस के मुताबिक, निषाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने आरक्षण की मांग को लेकर अठवा मोड़ चौराहे पर जाम लगा लिया। इसी वक्त मोदी की रैली खत्म हुई थी और रैली में आईं गाड़ियां मुहम्मदाबाद की ओर जा रही थीं। ऐसे में पुलिसकर्मियों ने निषाद समाज के लोगों को वहां से हटाने का प्रयास किया। तभी भीड़ उग्र हो गई और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया।

अस्पताल ले जाते वक्त मौत हुई
पथराव में हेड कॉन्स्टेबल सुरेश वत्स जख्मी हो गए। अस्पताल जाते वक्त रास्ते में उनकी मौत हो गई। वत्स प्रतापगढ़ के लक्षीपुर-रानीपुर के रहने वाले थे और करीमुद्दीनपुर थाने में पदस्थ थे। भीड़ ने पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ भी की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मारे गए सिपाही के परिवार को 50 लाख रुपए की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है।

एसपी यशवीर सिंह समेत एएएसपी सिटी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस के जवानों ने हल्का बल प्रयोग कर जाम को समाप्त किया। एसपी ने बताया कि घटना की सूचना मृतक के परिवार के लोगों को मोबाइल के जरिये दे दी गई है। इस मामले में मुकदमा दर्ज किया जायेगा। उन्होंने बताया कि बवालियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। मारे गए सिपाही सुरेंद्र वत्स प्रतापगढ़ के लक्षीपुर-रानीपुर के मूल निवासी थे।

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